इसे आम बोलचाल की भाषा में 'लिक्विड गोल्ड' कहा जाता है. कुछ एक्सपर्ट्स तो इसे 'मैजिकल पावर्स' का सोर्स कहते हैं.
वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि ब्रेस्ट मिल्क नवजात शिशुओं की ग्रोथ के लिए ज़रूरी है क्योंकि इससे बच्चों को ज़रूरी न्यूट्रिशयन और एंटीबॉडी मिलते हैं.
लेकिन कुछ वयस्क भी इस सुपरफूड की क्षमता पर भरोसा कर रहे हैं.
जेमसन रिटेनॉर तीन बच्चों के पिता हैं और उन्होंने पहली बार ब्रेस्ट मिल्क तब लिया जब उनकी पार्टनर मेलिसा ब्रेस्टफीडिंग करवा रही थीं.
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उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैंने पहली बार ब्रेस्ट मिल्क को शेक में मिलाया. हालांकि उन्हें ये थोड़ा अजीब लगा."
जेमसन तब ब्रेस्ट मिल्क को लेकर उत्सुक हुए जब उन्होंने एक यूट्यूब वीडियो में ब्रेस्ट मिल्क पीने के फ़ायदों के बारे में सुना. इस वीडियो में एक बॉडीबिल्डर ने ब्रेस्ट मिल्क के फ़ायदे बताए थे.
पार्टनर का ब्रेस्ट मिल्क पीना जेमसन की रोजाना की आदत में शुमार हो गया है. वो प्रतिदिन 450 ग्राम ब्रेस्ट मिल्क लेते हैं.
उन्होंने कहा, "मैं अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे दौर में हूं. इससे मसल्स बनाने में मदद मिल रही है. आठ हफ़्ते में पांच फ़ीसदी मसल्स हासिल करते हुए मेरा वजन कम हो रहा था."
जेमसन कहते हैं उन्हें याद नहीं है कि ब्रेस्ट मिल्क को डाइट का हिस्सा बनाने के बाद वो बीमार पड़े हों या फिर उन्हें कोल्ड भी हुआ हो.
वो कहते हैं, "मैं एक बच्चे की तरह ग्रो करना चाहता हूं, मैं एक बच्चे की तरह सोना चाहता हूं, इसलिए मैंने एक बच्चे की तरह डाइट अपनाने का फैसला किया. मैं अच्छा महसूस कर रहा हूं, मैं अच्छा दिख रहा हूं."
ऑनलाइन खरीदने में है रिस्कवैज्ञानिक कहते हैं कि इस बात का कोई साइंटिफिक एविडेंस नहीं हैं कि ब्रेस्ट मिल्स से वयस्क को कोई फ़ायदा होता है.
लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके फ़ायदे हो सकते हैं और इस बात के साक्ष्य भी हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, सैन डिएगो में ह्यूमन मिल्क इंस्टीट्यूट के फाउंडिंग डायरेक्टर डॉक्टर लार्स बोड कहते हैं, "इसमें बहुत सारा प्रोटीन होता है. एक बच्चे की मसल्स तेज़ी से बढ़ती हैं और बॉडीबिल्डर भी ऐसा ही चाहते हैं."
"बॉडीबिल्डर अपने शरीर को लेकर काफ़ी सजग होते हैं. इसलिए इसमें कोई बात तो हो सकती है. हम इसके पीछे की साइंस के बारे में नहीं जानते हैं."
लेकिन डॉ बोड अभी सावधानी बरतने की सलाह देते हैं क्योंकि ह्यूमन मिल्क अक्सर ऐसे ऑनलाइन सोर्स से ख़रीदा जाता है जो कि संदिग्ध होते हैं.
डॉ बोड ने चेतावनी देते हुए कहा, "उस मिल्क को टेस्ट नहीं किया गया है और इससे हेल्थ को गंभीर ख़तरा है. यह एचआईवी या हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का वाहक हो सकता है.
ब्रेस्ट मिल्क भी उतना ही अच्छा होता है व्यक्ति का आहार और सामान्य स्वास्थ्य. ये अनेक संक्रमणों का वाहक हो सकता है.
महिलाएं ऐसे वातावरण में ब्रेस्टफीडिंग करती हैं जो कि पूरी तरह से बीमारी मुक्त नहीं होता है, इसलिए मिल्क के भी संक्रमित होने का ख़तरा रहता है.

अमेरिका में नेशनवाइड चिल्ड्रेंस हॉस्पिटल की 2015 में की गई एक स्टडी में मालूम चला कि ऑनलाइन ख़रीदे गए ब्रेस्ट मिल्क के 101 नमूनों में से 75% में हानिकारक रोगाणु मौजूद थे. इतना ही नहीं 10% सैंपल में गाय के मिल्क के फ़ॉर्मूला की मिलावट थी.
जब जेमसन का अपनी पार्टनर मेलिसा से अलग हो गए तो उनके पास ब्रेस्ट मिल्क की उपलब्धता नहीं रही. फिर उन्होंने इसे ऑनलाइन खरीदने का फैसला किया.
उन्होंने कहा कि उन्हें मिलावट के खतरों के बारे में जानकारी नहीं थी.
जेमसन ने कहा, "मैंने इसे इंटरनेट के जरिए खरीदा. हालांकि मैंने फेसबुक के जरिए जांच की थी और मुझे वो सामान्य ही लगे. इसलिए मैंने ये मंगवाने का फैसला किया."
साइंटिफ़िक डेटा की कमी उन्हें परेशान नहीं करती है क्योंकि वो कहते हैं उनके अपने अनुभव में इससे फ़ायदा ही हासिल हुआ है.
उनके लिए जो बात पॉजिटिव नहीं रही वो है इससे मिला कुछ बुरा अनुभव.
वो कहते हैं, "लोग निश्चित रूप से मेरी ओर हैरानी से देखते थे, क्योंकि हमारा दिमाग़ मानता है कि ये दूध बच्चों के लिए होता है. लेकिन यह उतना अजीब नहीं है जितना लोग सोचते हैं."
कमजोर शिशुओं की बढ़ सकती हैं मुश्किलेंह्यूमन मिल्क पर रिसर्च करने वाले डॉक्टर मेघन आज़ाद कहते हैं, "मैं कभी वयस्क को ब्रेस्ट मिल्क पीने की सलाह नहीं दूंगा."
"मैं ये नहीं मानता कि इसे पीने पर कोई नुक़सान है. लेकिन जिन शिशुओं को इसकी ज़रूरत है उनके लिए वयस्क का ब्रेस्ट मिल्क पीना ख़तरा बन सकता है. शिशुओं को ब्रेस्ट मिल्क हासिल करने में परेशानी हो सकती है."
डॉक्टर बोड भी मानते हैं कि अगर ह्यूमन मिल्क ज़्यादा है तो उसे जरूरतमंद बच्चों को मुहैया करवाना चाहिए, बजाए कि इसे प्रॉफ़िट के लिए बेचने के.
उन्होंने कहा, "हमारे पास इतना मिल्क भी नहीं है कि हम कमज़ोर बच्चों की ज़रूरत को पूरा कर पाएं. ब्रेस्ट मिल्क में ऐसे गुण होते हैं जो बच्चों को बीमारी से बचाते हैं."
डॉक्टर आज़ाद इस फैक्ट की ओर इशारा करते हैं कि अगर संघर्ष कर रहीं माएं ये सोचती हैं कि ब्रेस्ट मिल्क को बेचकर पैसा हासिल किया जा सकता है जो इससे जोखिम भरी प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है.
हालांकि जेमसन ख़ुद को गुनहगार नहीं मानते हैं.
वो कहते हैं, "लोगों ने मुझ पर बच्चों को भूखा रखने का आरोप लगाया है. लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं अस्पतालों के बाहर खड़ा होकर माताओं से अपना सारा मिल्क मुझे देने के लिए कह रहा हूँ!"
वो ये दावा करते हैं कि कम से कम 100 महिलाओं ने ब्रेस्ट मिल्क बेचने के लिए उनसे संपर्क किया है.
हेल्थ को क्या फ़ायदा हो सकता है?
ह्यूमन मिल्क पर अभी ज़्यादा रिसर्च नहीं हुई है.
डॉ आजाद कहते हैं, "रिसर्च के लिए जो लोग फंड करते हैं वो लंबे समय तक ब्रेस्ट मिल्क की परवाह ही नहीं करते, क्योंकि वो इसे महिलाओं के ग़ैर-ज़रूरी मुद्दे की तरह देखते हैं. ये देखने का पितृसत्तात्मक नज़रिया है."
हालांकि इसमें बदलाव हो रहा है.
वयस्कों के ब्रेस्ट मिल्क पीने के ख़तरों के बीच कुछ ऐसे फ़ैक्टर हैं जिनमें वयस्कों को ब्रेस्ट मिल्क पीने से फ़ायदा मिलता है. इससे गठिया, हृदय रोग, कैंसर, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसे बीमारियों में फ़ायदा मिलने पर रिसर्च हो रही है.
डॉ आज़ाद ह्यूमन मिल्क ओलिगोसेकेराइड्स के हेल्थ को होने वाले संभावित फ़ायदों को लेकर उत्साहित हैं. ये ह्यूमन मिल्क में पाए जाने वाले प्रीबायोटिक फ़ाइबर हैं.
ये फाइबर वयस्क डाइजेस्ट नहीं कर सकते हैं. लेकिन शिशुओं में इससे फ़ायदेमंद गट बैक्टिरिया डेवलप हो सकते हैं.
डॉ आजाद कहते हैं, "रिसर्चर्स ये देख रहे हैं कि ओलिगोसेकेराइड्स से वयस्कों की आंतों में आई सूजन को फ़ायदा पहुंच सकता है या नहीं."
"हम जानते हैं कि हेल्थ के कई सारे पहलुओं के लिए माइक्रोबायोम ज़रूरी हैं. हम देख सकते हैं कि गट के माइक्रोबायोम में और सुधार कैसे हो सकते हैं और इसके और क्या फ़ायदे हो सकते हैं. ब्रेस्ट मिल्क इसमें काफ़ी उम्मीद जगाता है."
2021 में चूहों पर की गई एक स्टडी में डॉ बोड ने पाया कि एक एचएमओ ने एथेरोस्क्लेरोसिस के विकास को कम किया जो धमनियों में रुकावट पैदा कर दिल के दौरे और स्ट्रोक का कारण बनती है.
वो कहते हैं, "अधिकतर दवाइयां जो कि आर्टिफ़िशियल कंपाउंड से बनाकर ह्यूमन बॉडी को दी जाती हैं उनके बजाए ह्यूमन मिल्क के कंपाउंड्स अधिक सुरक्षित और प्रभावी हैं."
हालांकि इनमें महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं, लेकिन इसका क्लिनिकल डेटा अभी भी दुर्लभ है.
डॉ बोड कहते हैं अगर क्लिनिकल स्टडी के बेहतर नतीजे मिलते हैं तो इन कंपाउंड से दिल का दौरा और स्ट्रोक को रोकने में मदद मिल सकती है. दिल का दौरा और स्ट्रोक की वजह से हर साल लाखों लोगों की जान जाती है.
डॉ बोड ने कहा, "आप सोचकर देखिए कि अगर इससे दिल का दौरा और स्ट्रोक से होने वाली मौतें कम हो जाती हैं तो ये कितना बड़ा डेवलपमेंट होगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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