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अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे पर अगली सुनवाई 6 सितंबर को

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अजमेर, 30 अगस्त (Udaipur Kiran) ।

अजमेर की अदालत ने दरगाह शरीफ परिसर में संकट मोचन महादेव मंदिर के दावे से जुड़े मामले की सुनवाई अब 6 सितंबर को करने का फैसला किया है। शनिवार को सुबह से शुरू हुई जिरह बहस शाम तक चली। अदालत ने सीपीसी की धारा 7/10 पर बहस पूरी कर आदेश सुरक्षित रखा और अब अगली तारीख को धारा 7/11 पर सुनवाई होगी।

शनिवार को अदालत परिसर में खादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से हलचल रही। वहीं इस मामले में पूर्व विधायक ज्ञान देव आहूजा ने भी अदालत में हाजिरी लगाई और वादी पक्ष का समर्थन किया।

इस मामले में वादी विष्णु गुप्ता ने मीडिया को बताया कि अदालत में सीपीसी की धारा 7/11 पर सुनवाई नहीं हो सकी। सुबह से शाम तक प्रार्थना पत्र 7/10 पर ही जिरह बहस हुई। वादी पक्ष के वकीलों ने शनिवार को अच्छी जिरह बहस की। दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगली सुनवाई पर अदालत सीपीसी की धारा 7/11 पर भी सुनवाई कर आदेश जारी कर देगा। इससे दरगाह में सर्वे का रास्ता साफ हो जाएगा। हिन्दुओं को न्याय मिलेगा।

वादी के वकील ने बताया कि शनिवार को दो प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई शुरू हुई थी एक एएसआई व दूसरी अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत किया गया था। दोनों प्रार्थना पत्रों में जो आदेश 7 नियम 10 है उसकी भावना यह कहती है कि अगर हमने गलत न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है तो वह सही न्यायालय के क्षेत्राधिकार में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। लेकिन प्रतिवादी पक्ष ने प्रार्थना पत्र के अंदर के बिंदुओं पर अर्जी लगाई जिसके तहत उन्हें नोटिस नहीं मिलने आदि की बात है। लिहाजा प्रार्थना पत्र की भावना व प्रार्थना पत्र के शीर्षक की भावना दोनों के तहत वे अनुतोष नहीं मांग सकते थे।

पूर्व विधायक ज्ञान देव आहूजा ने कहा कि हम सत्य की नींव पर खड़े हैं झूठ की नींव पर नहीं खड़े है जीत हमारी होगी। उन्होंने कहा कि गजानन जी, हनुमानजी सभी हमारे साथ है। अगली सुनवाई पर स्थिति साफ हो जाएगी।

दूसरी और अजमेर दरगाह स्थित खादिमों की संस्था अंजुमन के सचिव सरवर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि जो भी एंटी मुस्लिम केस करे एंटी मुस्लिम एजेंडा लेकर आता है उसे बड़ा चढ़ा कर प्रचार प्रसार किया जाता है। ऐसा पिछले 11 साल से हो रहा है। मस्जिद दरगाह के नीचे मंदिर देखे जा रहे है। मॉब लीचिंग हो रही है। मुल्ला मौलवियों को आरोपित किया जा रहा है यही सब हो रहा है। इससे सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंच रही है। अजमेर दरगाह ऐसी जगह है जहां सभी लोगों की धार्मिक आस्था है उसे भी खराब किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन द्वारा आज विष्णु गुप्ता को अदालत में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। उस पर गोली चलने की बात है तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही। कहा हैं रिपोर्ट क्या एक्शन हुआ।

गौरतलब है कि इस मामले में अदालत में वादी के विरुद्ध अनेक प्रार्थना पत्र दायर हुए जिससे कहा गया कि यह वाद विचारण योग्य ही नहीं है। धारा 7/11, जिसका पूरा अर्थ सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 7 नियम 11 है, एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जो न्यायालय को कुछ खास परिस्थितियों में एक वादपत्र को खारिज करने की अनुमति देता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध आधारों वाले वाद ही न्यायालय में सुनवाई के लिए आगे बढ़ें, जिससे न्यायालय का समय और संसाधनों का दुरुपयोग न हो। अगली सुनवाई पर उम्मीद की जा रही है कि अदालत यह सुनिश्चित कर देगा कि वाद सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा या नहीं।

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(Udaipur Kiran) / संतोष

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